शुक्रवार, 29 जुलाई 2011
सत्कर्मोँ से ही कल्याण
एक बार राजा जनक मुनि पाराशर जी के सत्संग के लिए पहुँचे । उन्होँने मुनिश्री से पूछा , 'मुनिवर , कौन-सा कर्म संपूर्ण प्राणियोँ के लिए लोक व परलोक , दोनोँ मेँ कल्याणकारी है ?'
मंगलवार, 31 मई 2011
विश्वास और प्रार्थना
"विश्वास और प्रार्थना " आत्मा के दो विटामिन है;
कोई भी व्यक्ति इनके बिना स्वस्थ जीवनयापन नहीँ कर सकता है ।
शुक्रवार, 20 मई 2011
भाईचारे की आवश्यकता
हमेँ भाईयोँ की तरह मिलकर रहना अवश्य सीखना होगा अन्यथा मूर्खोँ की तरह सभी बरबाद हो जाएंगे ।
रविवार, 15 मई 2011
खुद पर भरोसा रखेँ
अपने आप पर यदि हमेँ विश्वास नहीँ है तो सफलता हमसे कोसोँ दूर रहती है । विश्वास ऐसी शक्ति है जो हमेँ कठिनाइयोँ मेँ संबल प्रदान करता है , हमारा मार्गदर्शन करता है । हमेँ प्रेरणा और उत्साह से भर देता है ।
शनिवार, 14 मई 2011
भूत, भविष्य और वर्तमान
जो बीत गया है उसकी परवाह न करेँ,
जो आने वाला है उसका स्वप्न न देखेँ ,
अपना सारा ध्यान वर्तमान पर केन्द्रित करेँ ।
मंगलवार, 5 अप्रैल 2011
आशा और प्रयास
जब दुनिया यह कहती है कि "हार मान लो" , तो
आशा धीरे से कान मेँ कहती है कि "एक बार फिर से प्रयास करो" ।
प्रसन्नता और सन्तुलन
प्रसन्नता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने जीवन के समीकरण को सकारात्मक और नकारात्मक अनुभवोँ
तथा मनोवृत्तियोँ के बीच किस प्रकार से सन्तुलित करते हैँ ।
रविवार, 30 जनवरी 2011
बुराईयाँ और सृज्जनता
अगर आप अपने दिल और दिमाग के थोड़े से भी हिस्से को बुराईयोँ से रिक्त कर देगेँ
तो वह रिक्त स्थान अपने आप सृज्जनता से भर जायेगा ।
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